आठवीं अनुसूची में शामिल हो कुमाऊंनी भाषा

 

आठवीं अनुसूची में शामिल हो कुमाऊंनी भाषा


रुद्रपुर। राष्ट्रीय कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन का शुभारंभ रुद्रपुर में हुआ। इसका उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने दीप जलाकर किया। इसमें उनके साथ साहित्यकार कौस्तुभानंद चंदोला, प्रो. बहादुर सिंह बिष्ट, प्रो. वीरेंद्र सिंह बिष्ट, डॉ. एलएम उप्रेती व दयानंद आर्य रहे। इस दौरान कुमाऊंनी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग उठी।
शुक्रवार को डायट में आयोजित कार्यक्रम में पहरू पत्रिका के पूर्व संपादक और उत्तराखंड भाषा संस्थान के सदस्य डॉ. हयात सिंह रावत ने कहा कि 1728 में रामभद्र त्रिपाठी ने कुमाऊंनी में चाणक्य नीति का अनुवाद किया था। 1810 से गुमानी पंत से आज तक कुमाऊंनी भाषा में साहित्य लगातार कुमाऊंनी में लिखा जा रहा है। आज कुमाऊंनी में साहित्य लगभग सभी विधाओं में साहित्य लिखा जा रहा है।
कुमाऊंनी लेखक ब्रिगेडियर धीरेश जोशी ने कुमाऊंनी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की जरूरत बताई। कहा कि आठवीं अनुसूची में आने से कुमाऊंनी को आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलेगा, सरकार की योजनाओं का लाभ मिलेगा और संवैधानिक लाभ मिलेगा। वक्ताओं ने कहा कि कुमाऊंनी को युवा पीढ़ी तक भी पहुंचाना बहुत जरूरी है और कुमाऊंनी को उत्तराखंड के विद्यालयी पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की नितांत जरूरत है।

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