डॉक्टरों को महंगे उपहार देने वाली दवा कंपनियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त;बनेगी तीन सदस्यीय समिति
दवा कंपनियों और डॉक्टरों के बीच संबंधों की निगरानी के लिए तीन सदस्यीय समिति के गठन की तैयारी
नई दिल्ली। डॉक्टरों को महंगे उपहार और अन्य लाभ देने वाली दवा कंपनियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में अदालत ने ऐसी गतिविधियों पर निगरानी रखने और संबंधित नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए तीन सदस्यीय समिति के गठन का मुद्दा उठाया है।
दवा कंपनियों की ओर से डॉक्टरों को महंगे उपहार, विदेश यात्राएं और अन्य सुविधाएं दिए जाने को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। ऐसी गतिविधियों से दवाओं के चयन और मरीजों के उपचार संबंधी निर्णयों पर व्यावसायिक हितों के प्रभाव की आशंका जताई जाती रही है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और मरीजों के हितों को लेकर भी चिंताएं पैदा होती हैं।
दवा कंपनियों और डॉक्टरों के बीच होने वाले ऐसे लेन-देन को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने यूनिफॉर्म कोड फॉर फार्मास्यूटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज (UCPMP) लागू किया है। इसका उद्देश्य दवा कंपनियों के प्रचार संबंधी तौर-तरीकों में पारदर्शिता लाना और अनुचित प्रलोभनों पर रोक लगाना है।
मामले में तीन सदस्यीय समिति के गठन की पहल को दवा कंपनियों की मार्केटिंग गतिविधियों पर निगरानी और नियमों के पालन की व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, समिति की संरचना, अधिकार क्षेत्र और कार्यप्रणाली से संबंधित विस्तृत जानकारी की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
मरीजों के हितों पर जोर
स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जरूरी है कि डॉक्टरों द्वारा दवाओं का चयन मरीज की जरूरत, दवा की गुणवत्ता और चिकित्सकीय मानकों के आधार पर किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि दवा कंपनियों के प्रचार संबंधी नियमों का प्रभावी पालन होने से मरीजों के हितों की रक्षा करने में मदद मिल सकती है।


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