घर घर टिफिन पहुंचाने वाली ऋषिकेश की मिनाक्षी भाटिया बनी एसडीएम

घर घर टिफिन पहुंचाने वाली ऋषिकेश की मिनाक्षी भाटिया बनी एसडीएम




 सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच भी यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत में निरंतरता बनी रहे तो सफलता का रास्ता खुद बन जाता है। ऋषिकेश की मीनाक्षी भाटिया ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की पीसीएस परीक्षा में सफलता हासिल कर एसडीएम पद के लिए चयनित होकर इसी बात को साबित किया है। लेकिन, यह सब इतना आसान नहीं था। क्योंकि, मीनाक्षी की सफलता की कहानी संघर्षों की कठिन राह से होकर गुजरी।

 संघर्षों की दुरूह राह पार कर पाई मंजिल 

दोनों बहनों की कहानी संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास का उदाहरण है। मीनाक्षी के अनुसार उनकी मां लंबे समय से टिफिन सेवा संचालित करती हैं। पढ़ाई के साथ-साथ दोनों बहनें इस काम में उनका हाथ बंटाती थीं। वे घर-घर जाकर पैदल टिफिन पहुंचाती थीं और बाद में कुछ बचत होने पर स्कूटी खरीदी गई, जिससे समय की बचत होने लगी


मीनाक्षी ने बताया कि वह तहसील कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों तक भी टिफिन पहुंचाया करती थीं। आज उसी प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बनने जा रही हैं, जिसके कर्मचारियों को कभी वह भोजन पहुंचाती थीं।

 डेढ़ साल की उम्र में उठ गया पिता का साया

मीनाक्षी ने बताया कि वर्ष 2003 में उनके पिता का निधन हो गया था। उस समय उनकी उम्र करीब डेढ़ वर्ष थी, जबकि बड़ी बहन लगभग साढ़े छह वर्ष की थीं। उनके पिता ऋषिकेश आईएसबीटी क्षेत्र में एक छोटी दुकान चलाते थे। पिता के निधन के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। ऐसे कठिन समय में उनकी मां ने टिफिन सेवा शुरू की और उसी के सहारे परिवार का पालन-पोषण करते हुए दोनों बेटियों की शिक्षा जारी रखी

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